
भगवान विष्णु के छठे अवतार का जन्मोत्सव। धर्म, न्याय और साहस का प्रतीक।
ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र। शिव से प्राप्त 'परशु' से बने परशुराम।
सप्त चिरंजीवी में से एक। आज भी धरती पर मौजूद माने जाते हैं।
कठोर तप से प्रसन्न हुए शिव। मिला दिव्य फरसा 'परशु'। धर्म रक्षा का प्रतीक।
हैहयवंशी राजाओं के अत्याचार से पृथ्वी त्रस्त। कार्तवीर्य अर्जुन से बदला।
21 बार अत्याचारी राजाओं का किया संहार। धर्म और न्याय की स्थापना हेतु।
2026 में 19 अप्रैल को प्रदोष काल। सूर्यास्त के बाद 06:49 PM से पूजा शुभ।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। धर्म का साथ दें। साहस और सच्चाई से जिएं।
यह पर्व हमें अन्याय से लड़ने और धर्म की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।
भगवान परशुराम के जीवन और संदेश से प्रेरित हों।