
नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होने वाला है। पर क्या 33% कोटे का आधार सही है?
तमिलनाडु के सीएम एम.के. स्टालिन ने बिल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 2011 की जनगणना को आधार बनाने पर आपत्ति जताई है।
सरकार ने महिला आरक्षण के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया है। इसी पर स्टालिन ने सवाल खड़े किए हैं।
उनका कहना है कि 2026 में होने वाली नई जनगणना के बाद यह लागू होना चाहिए। ताकि नए आंकड़े सटीक प्रतिनिधित्व दे सकें।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा, विधानसभा और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 1/3 सीटें आरक्षित होंगी।
बिल के अनुसार, यह डिलिमिटेशन (निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन) के बाद लागू होगा। जो 2026 के बाद की जनगणना पर आधारित होगा।
कुछ विपक्षी दलों ने भी इस पर चिंता जताई है। वे चाहते हैं कि यह जल्द से जल्द लागू हो, न कि 2029 के बाद।
इस बिल का मकसद संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है।
स्टालिन और कुछ अन्य नेताओं का मानना है कि इस बिल को जल्द लागू करना चाहिए। पुराने आंकड़ों पर आधारित होने से देरी हो रही है।
सरकार का कहना है कि डिलिमिटेशन के बाद ही सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो पाएगा। इसके लिए नई जनगणना जरूरी है।
यह देखना होगा कि सरकार और विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है। और यह बिल कब तक लागू हो पाता है।
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