
आज है महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती का शुभारंभ। पीएम मोदी ने भी किया स्मरण, जानें उनके अद्भुत जीवन को!
वे भारत के महान समाज सुधारकों में से एक थे। उनके विचार नैतिक साहस और समाज के लिए अटूट समर्पण के प्रेरक उदाहरण हैं।
1827 में महाराष्ट्र के एक साधारण परिवार में जन्मे। शुरुआती चुनौतियों ने उन्हें शिक्षा और समाज के प्रति समर्पण से कभी नहीं रोका।
बचपन से ही वे बहुत जिज्ञासु थे और खूब किताबें पढ़ते थे। उनका मानना था: "हम जितना ज्यादा सवाल करते हैं, उतना ही अधिक ज्ञान निकलता है।"
ज्ञान किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है। जिसे सभी के साथ साझा किया जाना चाहिए, यह उनका अटूट विश्वास था।
जब समाज के बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, उन्होंने स्कूल खोले। वे कहते थे: "अगर स्कूल खोले जाएं, तो सबसे पहले लड़कियों के लिए खोले जाएं।"
उन्होंने शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया। आज भी उनके विचार युवाओं को रिसर्च और इनोवेशन के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास में गहरी जानकारी हासिल की। कहा: "किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय समाज को कमजोर करता है।"
उन्होंने कहा था: "जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आजादी नहीं मिल सकती।" इसी विचार को जमीन पर उतारने के लिए की कई संस्थाओं की स्थापना।
उनका 'सत्यशोधक समाज' आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण आंदोलनों में से एक था। यह महिलाओं, युवाओं और गांवों में रहने वाले लोगों की पुरजोर आवाज बना।
गंभीर बीमारी के बाद भी समाज के लिए उनका संघर्ष जारी रहा। सावित्रीबाई फुले ने उनके कार्यों को आगे बढ़ाया, बनीं भारत की पहली महिला शिक्षिका।
महात्मा फुले ने स्वयं बदलाव का माध्यम बनकर समाज को मजबूत किया। उनके 200वें जयंती वर्ष पर करें उनके विचारों को नमन!