
महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पर विशेष। जानें उनके जीवन की प्रेरक गाथा।
1827 में साधारण परिवार में जन्म। जिज्ञासु मन, किताबों से लगाव।
सभी के लिए शिक्षा का अलख जगाया। लड़कियों और वंचितों के लिए खोले स्कूल।
शिक्षा को न्याय व समानता का माध्यम बनाया। आज भी यह विचार प्रासंगिक है।
किसानों और मजदूरों के अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई। गरीबों-वंचितों को सम्मान दिलाने का संकल्प।
सामाजिक सुधार के लिए की स्थापना। मानवीय गरिमा और न्याय का प्रतीक।
गंभीर बीमारी भी डिगा न सकी। समाज के लिए संघर्ष जारी रखा।
भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में से एक। महात्मा फुले के कार्यों को आगे बढ़ाया।
पीड़ा को भाग्य नहीं, खत्म करने का प्रयास। बदलाव के स्वयं वाहक बने।
पुणे में महात्मा फुले को दी श्रद्धांजलि। उनके विचारों से प्रेरित आज का भारत।