
क्या आप भी क्रोध से परेशान हैं? आचार्य महाश्रमण ने बताया, कैसे करें इस पर नियंत्रण!
राजसमंद में आचार्य महाश्रमण ने 'करो क्रोध का निवारण' विषय पर महत्वपूर्ण प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा, मनोनुकूल परिस्थितियों में राग और प्रतिकूलता में क्रोध बाधक है।
आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि क्रोध व्यक्ति की कमजोरी है। इससे बचने का सतत प्रयास जरूरी है।
विपरीत परिस्थितियों में भी शांत रहना ही सच्चे संत का लक्षण है। शांत व्यक्ति ही संत है।
क्रोध आए तो कुछ समय के लिए मौन रहें। यह क्रोध को शांत करने का पहला कदम है।
गुस्सा आने पर तुरंत अपना स्थान बदल लें। माहौल बदलने से मन शांत होता है।
मन को शांत करने के लिए प्रेक्षाध्यान (Meditation) का अभ्यास करें। यह आंतरिक शांति देता है।
ये उपाय केवल साधु जीवन के लिए नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में भी उतने ही कारगर हैं।
सामूहिक परिस्थितियों में क्रोध आने पर मौन रखें, अनुप्रेक्षा करें और सहनशीलता को अपनाएं।
जहां तक संभव हो, क्रोध से बचें। हमेशा शांति और सद्भाव का मार्ग अपनाएं।
आचार्य महाश्रमण के बताए इन तरीकों से अपने क्रोध पर नियंत्रण पाएं और एक शांत जीवन जिएं।